प्रेम बीज है परमात्मा का

प्रेम में अड़चनें हैं। प्रेम में कठिनाइयां हैं। प्रेम का फूल बहुत से काटो के बीच खिलता है, सच, इसे मैं स्वीकार करता हूं लेकिन प्रेम काटा नहीं है।

प्रेम की झाड़ी में बहुत कांटे हैं, प्रेम तो उस झाड़ी का फूल है। इस डर से कि कहीं कोई काटा हाथ में न चुभ जाए—और निश्चित काटा हाथ में चुभ सकता है, कांटे वहां हैं; जो फूल को तोड़ने जाएगा, उसकी अंगुलियों में कभी खून आ सकता है—लेकिन वह खून दाव पर लगाने जैसा है।

फूल की तलाश में अगर थोड़ा खून गिरे, तो बुरा कुछ भी नहीं—खून का करोगे भी क्या और? आज नहीं कल गिर ही जाएगा, आज नहीं कल मिट्टी में सब मिल ही जाएगा।

इसके पहले कि मिट्टी तुम्हें अपने में लीन कर ले, तूफान में दो हाथ मार लो। इसके पहले कि कब्र में समा जाओ, जिंदगी, जवानी, जोश, इसका थोड़ा उपयोग करो, थोड़े पंख फैला लो!

और कांटे हैं जरूर। यही तो मजा है गुलाब के फूल को पाने का। कांटे न होते तो पाने में कुछ अर्थ भी न होता।

किनारा है दूर और तूफान है बड़ा, यही तो चुनौती है।

और मैं उसी को बूढ़ा कहता हूं जो जीवन की चुनौतियां छोड़ देता है। वही जवान है जो जीवन की सारी चुनौतियों को स्वीकार करता है।
चुनौती के स्वीकार की मात्रा ही जवानी की मात्रा है। तब कोई आदमी मरते दम तक जवान रह सकता है। और कोई आदमी पहले से ही का हो सकता है।

यह देश बुरी तरह बूढ़ा हो गया है। इस देश की फजा बूढ़ी हो गई है। इस देश की हवा बूढ़ी हो गई है। इस देश में बच्चे के ही पैदा होते हैं। पैदा होते से ही उनके जीवन में क्या—क्या गलत है, क्या—क्या बुरा है, क्या—क्या कठिन है, उसका ही सारा शिक्षण चलता है।

उन्हें जीवन को स्वयं देखने का मौका ही नहीं मिलता। वे अपनी परख पैदा नहीं कर पाते, अपना अनुभव नहीं ले पाते। वे किनारे पर ही अटक जाते हैं। वे कभी जवान नहीं हो पाते।

मैं तुम से चाहता हूं कि तुम उतरों तूफान में। तूफान से तैरे तो ही दूसरा किनारा पा सकोगे। इस पार संसार है उस पार परमात्मा है।

और प्रेम का तूफान है दोनों के बीच में।

लेकिन प्रेम को शुद्ध करते चलना है, रोज—रोज शुद्ध करते चलना है। प्रेम से गंदगी हटाते चलना है। प्रेम से कीचड़ छांटते चलना है और प्रेम के कमल को सम्हालते चलना है।

एक दिन जब प्रेम परिपूर्ण रूप से शुद्ध हो जाता है, जब अपने पूरे निखार को उपलब्ध होता है, तो वही भक्ति है।

तू खुर्शीद है बादलों में न छुप ।
तू महताब है जगमगाना न छोड़ ।
तू शोखी है, शोखी रियायत न कर।
तू बिजली है बिजली जलाना न छोड़।

अभी इश्क ने हार मानी नही ।ं
अभी इश्क को आजमाना न छोड़ ।।

प्रेम हारता ही नहीं। जब तक परमात्मा न मिल जाए, प्रेम हार ही नहीं सकता।

love

ओशो

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