गौतम बुद्ध – यशोधरा

गौतम बुद्ध ज्ञान को उपलब्ध होने के बाद घर वापस लौटे। बारह साल बाद वापस लौटे। जिस दिन घर छोड़ा था, उनका बच्चा, उनका बैटा एक ही दिन का था। राहुल एक ही दिन का था। जब आए तो वह बारह वर्ष का हो चुका था। और बुद्ध की पत्नी यशोधरा बहुत नाराज थी। स्वभावत:। और उसके एक बहुत महत्वपूर्ण सवाल पूछा। उसने पूछा कि मैं इतना जानना चाहती हूं; क्या तुम्हें मेरा इतना भीभरोसा न था कि मुझसे कह देते कि मैं जा रहा हूं? क्या तुम सोचते हो कि मैं तुम्हें रोक लेती? मैं भी क्षत्राणी हूं। अगर हम युद्ध के मैदान पर तिलक और टीका लगा कर तुम्हें भेज सकते है, तो सत्य की खोज पर नहीं भेज सकेत? तुमने मेरा अपमान किया है। बुरा अपमान किया है। जाकर किया अपमान ऐसा नहीं। तुमने पूछा क्यों नहीं? तुम कह तो देते कि मैं जा रहा हूं। एक मौका तो मुझे देते। देख तो लेते कि मैं रोती हूं, चिल्लाती हूं, रूकावट डालती हूं।कहते है बुद्ध से बहुत लोगों ने बहुत तरह के प्रश्न पूछे होंगे। मगर जिंदगी में एक मौका था जब वे चुप रह गए। जवाब न दे पाये। और यशोधरा ने एक के बाद एक तीर चलाए। और यशोधरा ने कहा कि मैं तुमसे दूसरी यह बात पूछती हूं कि जो तुमने जंगल में जाकर पाया, क्या तुम छाती पर हाथ रख कर कह सकते हो कि वह यहीं नहीं मिल सकता था?यह भी भगवान बुद्ध कैसे कहें कि यहीं नहीं मिल सकता था। क्योंकि सत्य तो सभी जगह है। और भ्रम वश कोई अंजान कह दे तो भी कोई बात मानी जाये, अब तो उन्होंने खुद सत्य को जान लिया है, कि वह जंगल में मिल सकता है, तो क्या बाजार में नहीं मिल सकता। पहले बाजार में थे तब तो लगता था सत्य तो यहां नहीं है। वह तो जंगल में ही है। वह संसार में कहां वह तो संसार के छोड़ देने परही मिल सकता है। पर सत्य के मिल जाने के बात तो फिर उसी संसार और बाजार में आना पडा तब जाना यहां भी जाना जा सकता था सत्य का नाहक भागे। पर यहां थोड़ा कठिन जरूर है, पर ऐसा कैसे कह दे की यहां नहीं है। वह तो सब जगह है। भगवान बुद्ध के पास इस बात का कोई उत्तर नहीं था। उन्होंने आंखे झुका ली।और तीसर प्रश्न जो यशोदा ने चोट की, शायद यशोदा समझ न सकी की बुद्ध पुरूष का यूं चुप रह जाना अति खतरनाक है। उस पर बार-बार चोट कर अपने आप को झंझट में डालने जैसा है, बुद्धों के पास क्या होता है। ध्यान-ध्यान-ध्यान और सन्यास। सो इस आखरी चोट में यशोदा उलझ गई। तीसरी बात उसने कहीं, राहुल को सामने किया और कहा कि ये तेरे पिता है। ये देख, ये जो भिखारी की तरह खड़ा है, हाथ में भिक्षा पात्र लिए। यहीं है तेरे पिता। ये तुझे पैदा होने के दिन छोड़ कर कायरों की तरह भाग गये थे। अंधेरे में अपना मुहँ छूपाये। जब तू मात्र के एक दिन का था। अभी पैदा हुआ नवजात। अब ये लौटे है, तेरे पिता, देख ले इन्हीं जी भर कर। शायद फिर आये या न आये। तुझे मिले या न मिले। इनसे तू अपनी वसीयत मांग ले। तेरे लिए क्या है इनके पास देने के लिए। वह मांग ले।यह बड़ी गहरी चोट थी। बुद्ध के पास देने को था ही क्या। यशोधरा प्रतिशोध ले रही थी बारह वर्षों का। उसके ह्रदय के घाव जो नासूर बन गये थे। बह रहा था पीड़ा और संताप का मवाद। नहीं सूखा था वो जख्म जो बुद्ध उस रात दे कर चले गये थे। लेकिन उसने कभी सोचा भी नहीं था कि ये घटना कोई नया मोड़ ले लेगी। वह तो भाव में बहीं जा रही थी। बात को इतने आगे तक खींच लियाथा अब उस का तनाव उसकी तरफ वापस लौटेगा। इस की और उसकाध्यान गया ही नहीं। भगवान जो इतनी देर से शांत बैठे थे उनके चेहरे पर मंद हंसी आई, यशोधरा का क्रोध और भभकउठा। उस इस बात का एहसास भी नहीं हो रहा था की वह बंद रही है मकड़ी की तरह अपने ही ताने बाने में।भगवान ने तत्क्षण अपना भिक्षा पात्र सामने खड़े राहुल के हाथ में दे दिया। यशोधरा कुछ कहें या कुछ बोले। यह इतनी जल्दी हो गया। कि उसकी कुछ समझ में नहीं आया। इस के विषय में तो उसने सोचा भी नहीं था। भगवान ने कहा,बेटा मेरे पास देने को कुछ और है भी नहीं,लेकिन जो मैंने पाया है वह तुझे दूँगा। जिस सर्व सब के लिए मैने घर बार छोड़ा तुझे तेरी मां, और इस राज पाट को छोड़, और आज मुझे वो मिल गया है। मैं खुद चाहूंगा वही मेरे प्रिय पुत्र को भी मिल जाये। बाकी जो दिया जा सकता है। क्षणिक है। देने से पहले ही हाथ से फिसल जाता हे। बाकी रंग भी कोई रंग है। संध्या के आसमान की तरह,जो पल-पल बदलते रहते है। में तो तुझे ऐसेरंग में रंग देना चाहता हूं जो कभी नहीं छुट सकता। तू संन्यस्त हो जा।बारह वर्ष के बेटे को संन्यस्त कर दिया। यशोधरा की आंखों से झर-झर आंसू गिरने लगे। उसने कहां ये आप क्याकर रहे है।पर बुद्ध ने कहा,जो मरी संपदा है वही तो दे सकता हूं। समाधि मेरी संपदा है, और बांटने का ढंग संन्यास है। और यशोधरा, जो बीत गई बात उसे बिसार दे। आया ही इसलिए हूं कि तुझे भी ले जाऊँ। अब राहुल तो गया। तू भी चल। जिस संपदा का मैं मालिक हुआ हूं। उसकी तूँ भी मालिक हो जा।और सच में ही यशोधरा ने सिद्ध कर दिया कि वह क्षत्राणी थी। तत्क्षण पैरों में झुक गई और उसने कहा,मुझे भी दीक्षा दें। और दीक्षा लेकर भिक्षुओं में, संन्यासियों में यूं खो गई कि फिर उसका कोई उल्लेख नहीं है। पूरे धम्म पद में कोई उल्लेख नहीं आता। हजारों संन्यासियों कि भीड़ में अपने को यूँ मिटा दिया। जैसे वो है ही नहीं। लोग उसके त्याग को नहीं समझ सकते। अपने मान , सम्मान, अहंकार को यूं मिटा दिया की संन्यासी भूल ही गये की ये वहीं यशोधरा है। भगवान बुद्ध की पत्नी। बहुत कठिन तपस्या थ buddha-2 की। पर वोउसपर खरी उतरी। उसकी अस्मिता यूं खो गई जैस कपूर। बौद्ध शास्त्रों में इस घटना के बाद उसका फिर कोई उल्लेख नहीं आता। कैसे जीयी, कैसे मरी,कब तक जीयी, कब मरी, किसी को कुछ पता नहीं।हां राहुल का जरूर जिक्र आता है बौद्ध शास्त्रों में जब उसे ब्रह्म ज्ञान प्राप्त हुआ, शायद वह सोलह साल का था। उस रात उसे मार ने डराया, वह संन्यासियों की कतार में बहुत दूर सोता था। एक साधारण सन्यासी की तरह। उस रात वह जब मार ने उसे डराया, तब वह गंध कुटी केबहार आ कर सो गया। भगवान बुद्ध की कुटिया को गंध कुटी कहते थे। उसी रात राहुल ब्रह्म ज्ञान को उपलब्ध हुआ। मात्र राहुल का भी बौद्ध ग्रंथों में यही वर्णन आता है। कठिन था जीवन, रोज-रोज भिक्षा मांग कर खानी होती थी। और जब आप अति विशेष हो तो आपको अपनी अति विशेषता को छोड़ना अति कठिन है। यशोधरा और राहुल ने छोड़ा, उन संन्यासियों की भिड़ में ऐसे गुम हो गये। यूं लीन हो गये, यूं डूब गये, इसको कहते है आन। कि आने के पद चाप भीआप न देख सके कोई ध्वनि भी न हुई, कोई छावा तक नहीं बन।तभी कोई अपने घर आ सकता है। बेड़ बाजा बजा कर केवल आनेका भ्रम पैदा कर देना है।~~~ओशो ~~

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चार आर्य सत्य

तथागत गौतम बुद्ध के विचार-

Buddhha
1. दुनिया में दुःख है।
2. दुखों की कोई-न-कोई वजह है।
3. दुखों का निवारण मुमकिन है।
4. दुःख निवारण का मार्ग है ।

– दुखों की मूल वजह अज्ञान है। अज्ञान के कारण ही इंसान मोह-माया और तृष्णा में फंसा रहता है।

– अज्ञान से छुटकारा पाने के लिए अष्टांग मार्ग का पालन है : 1. सही समझ, 2. सही विचार, 3. सही वाणी, 4. सही कार्य, 5. सही आजीविका, 6. सही प्रयास, 7. सही सजगता और 8. सही एकाग्रता।

– साधना के जरिए सर्वोच्च सिद्ध अवस्था को पाया जा सकता है। यही अवस्था बुद्ध कहलाती है और इसे कोई भी पा सकता है।

– इस ब्रह्मांड को चलानेवाला कोई नहीं है और न ही कोई बनानेवाला है।

– न तो ईश्वर है और न ही आत्मा। जिसे लोग आत्मा समझते हैं, वह चेतना का प्रवाह है। यह प्रवाह कभी भी रुक सकता है।

– भगवान और भाग्यवाद कोरी कल्पना है, जो हमें जिंदगी की सचाई और असलियत से अलग कर दूसरे पर निर्भर बनाती है।

– पांचों इंद्रियों की मदद से जो ज्ञान मिलता है, उसे आत्मा मान लिया जाता है। असल में बुद्धि ही जानती है कि क्या है और क्या नहीं। बुद्धि का होना ही सत्य है। बुद्धि से ही यह समस्त संसार प्रकाशवान है।

– मरने के बाद चेतना महा सुषुप्ति में सो जाती है। वह लंबे समय तक ऐसे ही पड़ी रह सकती है या फौरन ही दूसरा जन्म लेकर संसार के चक्र में फिर से शरीक हो सकती है।

– न यज्ञ से कुछ होता है और न ही धार्मिक किताबों को पढ़ने मात्र से। धर्म की किताबों को गलती से परे मानना नासमझी है। पूजा-पाठ से पाप नहीं धुलते।

– जैसा मैं हूं, वैसे ही दूसरा प्राणी है। जैसे दूसरा प्राणी है, वैसा ही मैं हूं इसलिए न किसी को मारो, न मारने की इजाजत दो।

– किसी बात को इसलिए मत मानो कि दूसरों ने ऐसा कहा है या यह रीति-रिवाज है या बुजुर्ग ऐसा कहते हैं या ऐसा किसी धर्म प्रचारक का उपदेश है। मानो उसी बात को, जो कसौटी पर खरी उतरे। कोई परंपरा या रीति-रिवाज अगर मानव कल्याण के खिलाफ है तो उसे मत मानो।

– खुद को जाने बगैर आत्मवान नहीं हुआ जा सकता। निर्वाण की हालत में ही खुद को जाना जा सकता है।

– इस ब्रह्मांड में सब कुछ क्षणिक और नश्वर है। कुछ भी स्थायी नहीं। सब कुछ लगातार बदलता रहता है।

– एक धूर्त और खराब दोस्त जंगली जानवर से भी बदतर है, क्योंकि जानवर आपके शरीर को जख्मी करेगा, जबकि खराब दोस्त दिमाग को जख्मी करेगा।

– आप चाहे कितने ही पवित्र और अच्छे शब्द पढ़ लें या बोल लें, लेकिन अगर उन पर अमल न करें, तो कोई फायदा नहीं।

– सेहत सबसे बड़ा तोहफा है, संतुष्टि सबसे बड़ी दौलत और वफादारी सबसे अच्छा रिश्ता है।

– अमीर और गरीब, दोनों से एक जैसी सहानुभूति रखो क्योंकि हर किसी के पास अपने हिस्से का दुख और तकलीफ है। बस किसी के हिस्से ज्यादा तकलीफ आती है, तो किसी के कम।

– हजारों लड़ाइयां जीतने से बेहतर खुद पर जीत हासिल करना है। आपकी इस जीत को न देवता छीन सकते हैं, न दानव, न स्वर्ग मिटा सकता है, न नरक।

– इंसान को गलत रास्ते पर ले जानेवाला उसका अपना दिमाग होता है, न कि उसके दुश्मन।

– शक से बुरी आदत कोई नहीं होती। यह लोगों के दिलों में दरार डाल देती है। यह ऐसा जहर है, जो रिश्तों को कड़वा कर देता है। ऐसा कांटा है, जो घाव और तकलीफ देता है। यह ऐसी तलवार है, जो मार डालती है।

– गुस्से के लिए आपको सजा नहीं दी जाएगी, बल्कि खुद गुस्सा आपको सजा देगा

FAMILY , MARRIAGE & LOVE

Family

ओशो कहते हैं कि एक-एक परिवार में कलह है।
जिसको हम गृहस्थी कहते हैं,
वह संघर्ष, कलह, द्वेष, ईर्ष्या और चौबीसों घंटे उपद्रव का अड्डा बनी हुई है।
लेकिन न मालूम हम कैसे अंधे हैं कि देखने की कोशिश भी नहीं करते।
बाहर जब हम निकलते हैं तो मुस्कराते हुए निकलते हैं।
घर के सब आंसू पोंछकर बाहर जाते है- पत्नी भी हंसती हुई मालूम पड़ती है।
पति भी हंसता हुआ मालूम पड़ता है।
ये चेहरे झूठे हैं।
ये दूसरों को दिखाई पड़ने वाले चेहरे हैं।
घर के भीतर के चेहरे बहुत आंसुओं से भरे हुए है।
चौबीस घंटे कलह और संघर्ष में जीवन बीत रहा है।
फिर इस कलह और संघर्ष के परिणाम भी होंगे ही।

विवाह :

हमने सारे परिवार को विवाह के केंद्र पर खड़ा कर दिया है,
प्रेम के केंद्र पर नहीं।
हमने यह मान रखा है कि विवाह कर देने से दो व्यक्ति प्रेम की दुनिया में उतर जाएंगे।
अद्भुत झूठी बात है,
और पांच हजार वर्षों में भी हमको इसका ख्याल नहीं आ सका है।
हम अद्भुत अंधे हैं।
दो आदमियों के हाथ बांध देने से प्रेम के पैदा हो जाने की कोई जरूरत नहीं है।
कोई अनिवार्यता नहीं है बल्कि सच्चाई यह है कि जो लोग बंधा हुआ अनुभव करते हैं, वे आपस में प्रेम कभी नहीं कर सकते।

प्रेम:

प्रेम का जन्म होता है स्वतंत्रता में।
प्रेम का जन्म होता है स्वतंत्रता की भूमि में- जहां कोई बंधन नहीं, कोई मजबूरी नहीं है।
किंतु हम अविवाहित स्त्री या पुरुष के मन में युवक ओर युवती के मन में उस प्रेम की पहली किरण का गला घोंटकर हत्या कर देते हैं।
फिर हम कहते हैं कि विवाह से प्रेम पैदा होना चाहिए।

ओशो विचार क्रांति
— ओशो क्रांति.

Black & White

A white face is usually flat; it is rarely deep. But the dark color has depth and an intensity.

Of course, it is not extensive.

Have you noticed that wherever a river is deep its water looks dark and beautiful?

The beauty of a dark face does not end with the skin; it is not skin deep.

It has many layers, layers of transparency. on the other hand a white face is flat; it ends with the skin.

That is why when you meet a white person, you begin to feel bored with him after a little while. The dark color is enduring; it does not bore you. It has shade upon shade.

You will be surprised to know that currently all the glamorous women of the West are mad about suntans, tanning their skin by exposure to the sun.

In scores you can see them lying on every beach under the scorching sun so their color gets dark.

Why this craze for suntans?

The fact is, whenever a culture reaches its peak, expansiveness ceases to have much significance for it, it begins to seek depth and intensity.

We tend to think western people are more beautiful, but westerners are finished with appearances, they are now out to seek beauty in depth.

Now the beautiful women in the West are trying to get darker and darker. White has the characteristic that many more people appear beautiful than in a dark color, but its beauty lacks depth and transparency; it is flat and dull.

OSHO..face

Love Is Unconditional

LM !

The story of Majnu and Laila is a sufi story, a great love story. No other love story can be compared with it.

There are many in the world, almost every country has its own love stories, but nothing compared to Laila and Majnu because it has a sufi message in it. It is not just an ordinary story of muhabbah, it is the story of ishq.

It is said that Majnu decided one day that, seeing Laila, he had seen all that was worth seeing, so what was the use of keeping his eyes open anymore? He decided that whenever Laila would come he would open his eyes; otherwise he would remain blind because there was nothing else worth seeing.

For months Laila could not come – the parents were against, the society was against – and Majnu waited and waited under the tree where they used to meet, with closed eyes. Days passed, weeks and months passed, and he would not open his eyes.

And the story says God took compassion on him. He came to Majnu and said, “Poor Majnu, open your eyes. I am God himself. You have seen everything in the world, but you have not seen me.

Look who is standing before you. ”

Majnu is reported to have said, “Get lost. I have decided only to see Laila; nothing else is worth seeing. You may be God, but I am not concerned. Just get lost, don’t disturb me.”

Shocked, God said, “What are you saying? I have never come to anyone on my own. Seekers and devotees pray and search and practice – then too it is very, very difficult to see me – and I have come on my own and you have not even asked for me. I am coming just as a gift, and you are rejecting?”

And Majnu said, “If you really want to be seen by me, come as Laila, because I cannot see anything else. Even if I open my eyes I cannot see anything else. I look at a tree, and Laila is there. I look at the stars, and Laila is there. Laila is in my heart and she has possessed my whole heart, and whatsoever I see I see through my heart.

I am sorry, but there is no possibility, because there is no space left in my heart for anything else. I am sorry. Excuse me, but go away. Don’t disturb me.”

This is ishq. Even God… yes, even God can be renounced.

When you love, when you really love, there are no conditions. It is unconditional. You love for the sheer joy of it. And love is absolute – it knows no wavering, it knows no hesitation.

Sufism is a great experiment in human consciousness: how to transform human consciousness into ishq. It is alchemy.

Man can be transformed into pure love energy. Just as there is atomic energy discovered by physics, and a small atom can explode into tremendous power, each cell of your heart can explode into tremendous love. That love is called ishq. Sufism is the path of love.

~ Osho

True beauty of women

“कीर्ति ” का अर्थ है जिस स्त्री में ऐसी दृष्टि न हो , आनर जिसको अंग्रेजी में कहते है , इज्जत जिसे उर्दू में कहते है ,
” कीर्ति ” का अर्थ है ऐसी स्त्री जो अपने को वासना का विषय मानकर नहीं जीती , जिसके व्यक्तित्व से वासना की झंकार नहीं निकलती तब स्त्री को एक अनूठा सौन्दर्य उपलब्ध होता है वो सौंदर्य उसकी “कीर्ति ” है उसका यश है | आज वैसी स्त्री को खोजना बहुत मुश्किल पड़ेगा , बहुत मुश्किल पड़ेगा

कीर्ति एक आंतरिक गुण है , एक भीतरी सौन्दर्य , उस सौन्दर्य का नाम कीर्ति है जिसे देखकर वासना शांत हो उभरे नहीं , ये थोडा कठिन मामला है लेकिन एक बात हम समझ सकते है अगर स्त्री वासना को उभार सकती है तो शांत क्यों नहीं कर सकती जो भी उभार करने वाला बन सकता है वो शांत करने वाला शामक भी बन सकता है

अगर स्त्री अपने ढंगों से वासना को उत्तेजित करती है प्रज्वलित करती है तो अपने ढंगों से उस शांत भी कर दे सकती है , वो जो शांत कर देने वाला सौन्दर्य है कि दूसरा व्यक्ति वास्नातुर होक भी आ रहा हो विक्षिप्त होकर भी आ रहा हो तो स्त्री की आँखों से उस सौन्दर्य का जो दर्शन है , उसके व्यक्तित्व से उसकी जो छाया और झलक है जो उसकी वासना पर पानी डाल दे , और आग बुझ जाए उसका नाम ” कीर्ति ” है

“कीर्ति ” स्त्री के भीतर उस गुणवत्ता का नाम है जहाँ वासना पर पानी गिर जाता है , कीर्ति का अर्थ हुआ कि जिस स्त्री के पास बैठकर आपकी वासना तिरोहित हो जाए , इसलिए हमने माँ को इतना मूल्य दिया , कीर्ति के कारण माँ को हमने इतना मूल्य दिया , मातृत्व को इतना मूल्य दिया , पुराने ऋषियो ने आशीर्वाद दिए है बड़े अजीब आशीर्वाद कि दस तेरे पुत्र हो और अंत में तेरा पति तेरा ग्यारहवा पुत्र हो जाए और जब तक पति ही तेरा पुत्र न जाए तू जानना कि तूने स्त्री की परम गरिमा प्राप्त नहीं की , पति पुत्र हो जाए जिस आंतरिक गुण से जिस धर्म से उसका नाम “कीर्ति ” है |

कृष्ण कहते है स्त्रिओ में मैं “कीर्ति” ….
निश्चित ही बहुत दुर्लभ गुण है खोजना बहुत मुश्किल है , अभिनेताओं और अभिनेत्रियो के जगत में ” कीर्ति ” को खोजना बिलकुल मुश्किल है और मंच पर जो अभिनय कर रहे है वो तो कम् अभिनेता है उनकी नक़ल करने वाला जो बड़ा समाज है , इमीटेशन का वो सड़क पर चौराहों पर अभिनय कर रहे है

इस सदी में अगर सर्वाधिक किसी के गुणों को चोट पहुंची है तो वो स्त्री है क्योंकि उसके किन गुणों का मूल्य है उसकी धारणा ही खो गयी है

“कीर्ति” का हम कभी सोचते भी नहीं होगे आप बाप होगे आपके घर में लड़की होगी आप ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि इस लड़की के जीवन में कभी कीर्ति का जन्म हो , आप्पने लड़की को जन्म दे दिया और आप उसमें अगर कीर्ति का जन्म नहीं दे पाए तो आप बाप नहीं है सिर्फ एक मशीन है उत्पादन की , लेकिन कीर्ति बड़ी कठिन बात है और गहरी साधना से ही उपलब्ध हो सकती है

जब किसी पुरुष में वासना तिरोहित होती है तो ब्रहमचर्य फलित होता है और जब किसी स्त्री में वासना तिरोहित होती है तो” कीर्ति “फलित होती है , “कीर्ति” काउंटर पार्ट है , स्त्री में कीर्ति का फूल लगता है फल लगता है जैसे पुरुष में ब्रहमचर्य का फूल लगता है

ओशोMARY

प्रेम

Happy Rose Dayप्रेम तब निर्दोष होता है जब उसमें करने की कोई वजह नहीं होती..!!
प्रेम तब निर्दोष होता है, जब यह और कुछ नहीं, बस ऊर्जा का बांटना होता है। तुम्हारे पास बहुत अधिक है, इसलिए तुम बांटते हो..तुम बांटना चाहते हो। और जिसके साथ भी तुम बांटते हो, तुम उसके प्रति अनुग्रह महसूस करते हो, क्योंकि तुम बादल की तरह थे..बरसात की पानी से बहुत भरे हुए..और किसी ने तुम्हें हल्का होने में मदद की। या तुम फूल जैसे थे, खुशबू से भरे हुए, और हवा आकर तुम्हें हल्का कर देती है। या तुम्हारे पास गाने के लिए गीत है और किसी ने ध्यानपूर्वक सुना..इतना ध्यानपूर्वक कि तुम्हें गाने का अवसर दिया।
इसलिए जो कोई भी तुम्हें प्रेम में बहने में मदद करता है, उसके प्रति अनुग्रह आता है। आत्मसात करने की वह भावना अपनी जीवन शैली बन जाने दो, बिना कुछ लेने की बात सोचे देने की काबिलियत, बेशर्त देने की क्षमता, तुम बस देते हो क्योंकि तुम्हारे पास अधिकता है

Love is Joy

 

Love is the Path of Joy.

‘’Love is what we were born with. Fear is what we learned here.’’ Marianne Williamson.
LOVE BEGINS WITH YOU: Your inner voice is where your story of love begins: It is hard to feel worthy of love if someone is criticizing you all the time and especially if that someone is talking in your head.
True love isn’t about being inseparable; it’s about two people being true to each other even when they are separated.
Love and kindness is a way of living. Where there is love, there is no judgment. Where there is judgment, there is no love.
Love is the great transformer , the greatest medicine to heal the whole world.
Love is something you and I must have. We must have it because our spirit feeds
upon it.
Love is the greatest healing power of all.
Love fuels passion, hope and desire. It generates creativity giving us purpose and making us feel alive.
All your love matters and makes a difference.
Love is accepting others as they are, allow them to be themselves and stop trying to change them.
From Neale Donald Walsch, in his best-selling series Conversations With God, he shared one of the most profound solutions to any challenge you may ever be faced with. He gives us one of the most powerful 5-word questions you will ever hear. This is a question that you can ask yourself if you ever feel a need to react to someone else’s unkind behavior. Here’s the question: What would LOVE do now?
You can ask this question the next time you feel challenged to respond or react to someone who, you feel, has wronged you.
You see, love truly is ALL THERE IS. The Beatles sang.
Love is the path of joy. Love is the building block of life. Love takes the form of thoughts, words and deeds. Choosing love is like exercising any muscle. The more it is repeated, the easier it becomes.10940606_10205538848061119_5434712219934970355_n

Marriage

Love marriage

Love marriage

विवाह

मनुष्य की स्वतन्त्रता मे सबसे बड़ी बाधक …. सामाजिक व्यवस्था है …. !!

यदि फिर भी साथ रहना हो तो

हिम्मत करो
हिम्मत
बिना विवाह के साथ रहो

या फिर इतनी समझ को बढाओ की जब तुम्हारे संबंधो के दमन के कारण बदबू उठने लगे तो उसे सरलता से मुक्त होने दो ….इससे इस दुनिया मे आनंद बढ़ेगा … __/\__