True Love

True Loveजिसको आप प्रेम करते है..
यदि उसको पूजने का भाव
मन में न उठता हो तो समझ लो
कि तुम्हारा प्रेम..प्रेम नही सिर्फ
शारीरिक आकर्षण है।
प्रेम जहां लेन-देन है,
वहां बहुत जल्दी घृणा में परिणत हो सकता है,
क्योंकि वहां प्रेम है ही नहीं।
लेकिन जहां प्रेम केवल देना है,
वहां वह शाश्वत है,
वहां वह टूटता नहीं,
वहां कोई टूटने का प्रश्न नहीं,
क्योंकि मांग थी ही नहीं।
आपसे कोई अपेक्षा न थी
कि आप क्या करेंगे तब मैं प्रेम करूंगा।
कोई कंडीशन नहीं थी,
प्रेम हमेशा अनकंडीशनल है।
कर्तव्य,
उत्तरदायित्व,
वे सब अनकंडीशनल हैं,
वे सब प्रेम के रूपांतरण हैं..!!

!! ओशो !!

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The Last Truth

“मरते वक्त अधिक लोगों की
आंखों में यही भाव होता है।
तरसते हुए जाते हैं।
हां,
कभी-कभी ऐसा घटता है कि कोई भक्त,
कोई प्रेमी परमात्मा का तरसता हुआ
नहीं जाता,
लबालब जाता है।
मैं किसी और प्रेम की बात कर रहा हूं!
आंख खोलकर एक प्रेम होता है,
वह रूप से है।
आंख बंद करके एक प्रेम होता है,
व अरूप से है।
कुछ पा लेने की इच्छा से
एक प्रेम होता है वह लोभ है,
लिप्सा है।
अपने को समर्पित कर देने का
एक प्रेम होता है,
वही भक्ति है।”

!! ओशो !!meditating-buddha

Truth of Life

जिस दिन दिखाई पड़ जाता है
कि यह पूरी दुनिया भी मिल जाए
तो कुछ मिलेगा नहीं,
उस दिन आदमी आंख बंद करता है
और अपने भीतर देखता है।
तब अपना स्वरूप दिखाई पड़ता है
-मैं कौन हूं!
और जिसने जान लिया
मैं कौन हूं,
उसने सब जान लिया।
जो भी जानने योग्य है
सब जान लिया।
जो भी पाने योग्य है
सब पा लिया।

!! ओशो !!

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